जुदाई

(सदमा सहचारिणी का) यूँ जुदाई से मिलेंगे, ये कभी सोचा न था दर्द के तूफाँ चलेंगे, ये कभी सोचा न
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आँसू फूल बने

यादों में आँसू फूल बने पर तुम क्यों धूल बने? दोस्ती है नदिया, इक तट हम तुम दूजे कूल बने
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चाहे कहो लल्ला या चाहे रामलल्ला

चाहे कहो अल्ला या चाहे रामलल्ला काहेको शोरशराबा, क्यूँकर हल्लागुल्ला ? मंदिर था मस्जद थी, झगड़ा क्यों भाई ? खत्म
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क्यूँकर?

हाथ पेशानी पे इतनी बार क्यूँकर ? हाय ! मैं जंदा तेरे बिन, यार, क्यूँकर ? चाह थी बस, शाम
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पता नहीं

मन पुन: पुन: क्यों भर भर आता है , . . पता नहीं घन उदासपन का तम क्यों छाता है
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कहा न जाय

मन विकल हुआ है कितना , कहा न जाय जो घाव हु्आ है गहरा , सहा न जाय । इन
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