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Hindi / Hindustani Verses

पता नहीं

मन पुन: पुन: क्यों भर भर आता है , . . पता नहीं घन उदासपन का तम क्यों छाता है , . . पता नहीं । क्यों फिर फिर बोझल होती हैं साँसें? क्यों गला […]

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Hindi / Hindustani Verses

कहा न जाय

मन विकल हुआ है कितना , कहा न जाय जो घाव हु्आ है गहरा , सहा न जाय । इन आँखों से झर झर झर गिरता सावन ले मुझको खारी वर्षा बहा न जाय । […]