आँसू फूल बने

यादों में आँसू फूल बने
पर तुम क्यों धूल बने?

दोस्ती है नदिया, इक तट हम
तुम दूजे कूल बने ।

तुम से परिचय के कारण ही
हम भी माकूल बने ।

तुम्हरे बिन हम बिनकामके
‘आदमी-फजूल’ बने ।

काँटे तुमसंग बने चंदन
गुल तुमबिन शूल बने ।

तुम समा गए ईश्वर में, हम
‘ईश्वर की भूल’ बने ।

तस्वीर तुम्हारी देख रहे
तो अश्क बबूल बने ।

(मेरी आगामी बहुभाषिक किताब
‘हाथ मिलाये बिना गया वो’ में से )

– सुभाष स. नाईक

माकूल : सभ्य

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